एनएचएआई के 4 प्रोजेक्टों में जमीन अधिग्रहण बनी बाधा: 3500 एकड़ के लिए कई किसानों को नहीं मना सका प्रशासन; जहां पैसा जारी, वहां भी नहीं ले पाया कब्जे

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जालंधरएक घंटा पहलेलेखक: सुरिंदर सिंह

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नकोदर रोड कंग साहबू के पास हाईवे बनाने के लिए काटे जा रहे पेड़।

सिटी के ट्रैफिक को नए हाईवे के जरिये अमृतसर, बठिंडा, जाम नगर और लुधियाना से जोड़ने के लिए 2 साल से 4 प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। पहले रूट का सेटेलाइट सर्वे हुआ, फिर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के दिल्ली ऑफिस से मंजूरी मिली। पंजाब के तमाम विभागों की मंजूरियां लेकर लैंड एक्यूजीशन का प्रोसेस पूरा किया, जिसमें 2 साल बीत गए।

अब अंतिम दिनों में काम फंस गया। वजह यह है कि 3500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है, लेकिन किसानों को जिला प्रशासन जमीन देने के लिए तैयार नहीं कर सका। जहां पर पैसा जारी किया, वहां से कब्जा नहीं लिया जा सका। नतीजतन काम 6 महीने लेट हो गए। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हिमेश मित्तल का कहना है कि प्रोजेक्टों की शुरुआात उन गांवों से होनी है जो काफी पिछड़े हैं। अगर नए हाईवे तैयार होते हैं तो उन गांवों का विकास होगा और साथ में जमीनों के मूल्य भी बढ़ जाएंगे।

जमीन अधिग्रहण के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा। पैसे तक ट्रांसफर कर दिए हैं और ठेकेदार को काम भी सौंप दिया है। इन प्रोजेक्टों का सीधा लाभ पंजाब सरकार को होगा। जितना रेवेन्यू केंद्र को होगा, उसका 12 फीसदी जीएसटी सूबे को ही मिलना है। पंजाब हरियाणा और दिल्ली से जुड़ जाएगा। प्रोजेक्टों से लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में समय कम लगेगा और आसानी होगी।

सिटी को जामनगर, लुधियाना, बठिंडा व अमृतसर से जोड़ने की मंजूरी में लगे 2 साल

किसान बोले- उचित मुआवजे पर ही सौंपेंगे जमीनें
किसान कश्मीर सिंह का कहना है – रिंग रोड तैयार हो रही है जो जमशेर के पास से गुजरेगी। किसानों को जब तक उचित मुआवजा सरकार व प्रशासन नहीं देता तब तक जमीनें नहीं दी जाएंगी। कई बार डीसी घनश्याम थोरी को मिल चुके हैं कि उन्हें जमीन का सही मूल्य दिलाया जाए। अगर नहीं दिला सकते तो जमीनें भी अधिग्रहण नहीं होने दी जाएंगी।

अधिकारियों को काम में तेजी लाने के आदेश दिए

डीसी घनश्याम थोरी ने कहा कि सभी अधिकारियों को काम में तेजी लाने के लिए आदेश दिए हैं। शुक्रवार को मामले में रिव्यू किया है। नकोदर एसडीएम अॉफिस, एसडीएम जालंधर-2, एसडीएम फिल्लौर, डीआरओ, एसडीएम-1 दफ्तरों को हिदायतें जारी की गई हैं।

ऐसे समझें }प्रोजेक्ट की लागत, लाभ व पेंच फंसने के कारण
1. जालंधर बाईपास : होशियारपुर व लुधियाना को जालंधर से जोड़ेगा
स्टेट्स : डीपीआर तैयार। लागत 1365 करोड़। वित्तीय मंजूरी मिल चुकी। 917 एकड़ जमीन अधिग्रहण होनी है। 2 साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य। जालंधर बाईपास अमृतसर से शुरू होगा और पठानकोट से होते हुए होशियारपुर, लुधियाना व नकोदर (कंग साबू) से जुड़ेगा। हाईवे की जालंधर के हिस्से में 46 किलोमीटर लंबाई है। किसानों ने जमीनें देने से इंकार कर दिया है।
2. अमृतसर ग्रीन फील्ड कॉरिडोर : 54 किलोमीटर हिस्सा जिले में है शामिल
स्टेट्स : 155 किलोमीटर लंबे हाईवे में 15 किलोमीटर का एरिया सिटी में आता है जबकि 39 किलोमीटर हिस्सा देहाती है जो नकोदर-फिल्लौर का है। प्रोजेक्ट की कीमत 927 करोड़ है। कपूरथला, टिब्बा, बठिंडा, जाम नगर और अमृतसर के गांवों में से 767 एकड़ जमीन अधिग्रहण की जानी है। जमीनों का 400 करोड़ रुपए का अवॉर्ड किसानों को दिया जा चुका है, लेकिन कब्जा नहीं मिला। यह एक्सप्रेस वे बनने से जालंधरियों को अमृतसर-बठिंडा-जाम नगर की तरफ नया डायरेक्ट रूट मिल जाएगा। सरकार ने काम 2023 के अंत तक पूरा करने का टारगेट रखा लेकिन जमीन से देरी हो रही है।
3. दिल्ली-अमृतसर-जम्मू-कटरा एक्सप्रेस वे : सबसे ज्यादा 1800 करोड़ होंगे खर्च
स्टेट्स : प्रोजेक्ट की कीमत 1800 करोड़ रुपए के करीब अनुमानित है। जिले में 1485 एकड़ जमीन अधिग्रहण होगी। जालंधर में एक्सप्रेस वे 68 किलोमीटर लंबा होगा। 1485 एकड़ में 435 एकड़ फिल्लौर, 237 एकड़ नकोदर व 813 एकड़ जालंधर-2 सब डिवीजन से अधिग्रहण की जानी है। प्रशासन का दावा है कि 481 करोड़ रुपए के करीब किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन हाईवे अथॉरिटी कब्जा न मिलने की बात कह रही है। काम निपटाने का समय 2 साल ही है।
4. सब-वे : जालंधर से पठानकोट बाईपास के साथ बनेगा
स्टेट्स : यह प्रोजेक्ट 900 करोड़ का है। भोगपुर में 55 से 60, दसूहा में 60 से 70 और मुकेरियां में 65 से 70 हेक्टेयर जमीन किसानों से ली जानी है। जमीनें न मिलने पर हाईवे अथॉरिटी के लिए स्थिति जटिल बन रही है। अंतिम चरण में काम रुका हुआ है।​​​​​​​

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