आईटी पार्क के नाम पर गबन का मामला: दो पंच-सरपंच अरेस्ट, खुलासा-बड़े कांग्रेसी नेता ने दबाव डाल करवा दिए चेक पर साइन

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Smart Newsline (SN)

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पटियालाएक घंटा पहले

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राजपुरा आईटी पार्क प्रोजेक्ट मामले में सेहरी के कांग्रेसी सरपंच मंजीत सिंह व आकड़ी के कांग्रेसी पंच दर्शन सिंह को विजिलेंस ने अरेस्ट किया है।

राजपुरा आईटी पार्क प्रोजेक्ट मामले में सेहरी के कांग्रेसी सरपंच मंजीत सिंह व आकड़ी के कांग्रेसी पंच दर्शन सिंह को विजिलेंस ने अरेस्ट किया है। सरपंचों/पंचों व पंचायत विभाग के अधिकारियों सहित 17 लोगों व 10 फर्म पर शुक्रवार देर रात केस दर्ज किया था। शनिवार सुबह उनकी गिरफ्तारी को विजिलेंस ने 8 टीमें बना एकसाथ रेड की, अधिकतर आरोपी फरार हैं।

अरेस्ट आरोपियों ने पुलिस को बताया है कि एक बड़े कांग्रेसी नेता के कहने पर दिनेश बांसल फर्म (फर्म पर केस दर्ज हो चुका है) को इस काम का ठेका दिया गया। नेता ने दबाव बना चेक पर साइन करवाए। कई पंचों/सरपंचों को कमीशन भी दी गई। पुलिस नेता को हाथ डालने से पहले सुबूत इकट्‌ठा कर रही है।

अब तक सस्पेंड : 29 पंच, 5 सरपंच, 1 डीडीपीओ, 1 बीडीपीओ, 2 पंचायत सेक्रेटरी,1 जेई

भ्रष्टाचार की मिलीभगत में किसका क्या रोल…

1.सरपंच और पंच (सभी सस्पेंड): गांवों में आईटी पार्क मुआवजे की राशि से डेवलपमेंट करवानी थी। जहां 10 रुपए खर्च होने थे, इन्होंने वहां 20 रुपए खर्च किए। हाईकोर्ट के पंचायत के खाते सील करने के आदेश देने पर भी पैसे निकलवाए। खर्च पैसे का न रिकाॅर्ड पेश किया, न परमिशन ली।

2.दो पंचायत सेक्रेटरी और एक जेई (तीनों सस्पेंड): तीनों ने पांचों गांवों में हुए विकास कार्यों की क्वालिटी चेक करके सही होने का प्रमाण पत्र जारी करना था। ग्रांट सही यूज नहीं हुई तब भी इन्होंने सर्टीफिकेट व कार्रवाई रजिस्टर पर चेकिंग रिपोर्ट को सही करार दिया।

3.बीडीपीओ (सस्पेंड): पंचायत खाते से पैसे निकालने के लिए बीडीपीओ अधिकृत है। बीडीपीओ के साथ पंचायत का ज्वाइंट बैंक अकाउंट होता है। जब सरपंच की ग्रांट का पैसा निकालने की तय सीमा 50 हजार है तो लाखों रुपए की निकासी के लिए साइन कैसे किए।

4.डीडीपीओ (सस्पेंड): जहां शामलाट जमीन सैकड़ों एकड़ में आती है वहां डीडीपीओ का अधिकार क्षेत्र आता है। इन्होंने पंचायत अकाउंट्स से इतनी पैसे की निकासी का सही समय पर निरीक्षण क्यों नहीं किया।

फर्जी काश्तकार खड़े कर उन्हें दे दिया गया मुआवजा
सरकार ने आईटी पार्क के लिए 5 गांवों की 1104 एकड़ शामलात जमीन एक्वायर की थी। काश्तकारों को 9 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से और पंचायतों को 25 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से 70 करोड़ मुआवजा जारी किया था। पबरा के 13 किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दी कि कुछ नेताओं की शह पर पंचायत विभाग के अफसरों ने फर्जी काश्तकार खड़े कर उन्हें मुआवजा दिला दिया।

कोर्ट ने गांव पबरा की ग्राम पंचायत के खातों में से पैसों को निकालने पर स्टे लगा दी, इसके बावजूद पंचायत के पैसे से कार्य करवाए गए। बाकी 4 गांवों के सरपंच/पंचों पर बिना मंजूरी पंचायत के खातों से लाखों रुपए निकलवाने का आरोप है। पैसों का रिकॉर्ड भी नहीं दिया।

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