बाबा नानक दा ब्याह: सबसे पहला बारात रूपी नगर कीर्तन 1917 में अमृतसर से बटाला तक रेल से पहुंचा था

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कपूरथला16 घंटे पहलेलेखक: हरपाल रंधावा

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1926 में विवाह समागम के लिए ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से गुजरता नगर कीर्तन।

  • पंजाबी के लेखक कुलवंत सिंह खोखर की पुस्तक ‘गुरु नानक निवाजिया बटाला’ में विवाह समागम मनाने का जिक्र

श्री गुरु नानक देव जी का 12 सितंबर को विवाह समागम हो रहा है। बाबे दा विवाह मनाने की प्रक्रिया लगभग 100 साल पुरानी चली आ रही है। पंजाबी के लेखक डॉ. कुलवंत सिंह खोखर ने अपनी किताब गुरु नानक निवाजिया बटाला में लिखा है कि वर्ष 1917 में विवाह समागम मनाने के लिए बारात रूपी नगर कीर्तन अमृतसर से रेल के रास्ते बटाला में संगत पहुंची थी।

बारात को मोहल्ला दारा उल्ल इस्लाम के बाहर शिवालय में उतारा गया। संगत के ठहरने के लिए प्रबंध रेलवे स्टेशन के बाहर ही बनी सराय में होता था। गुरु ग्रंथ साहिब जी की अगुवाई में संगत कीर्तन करते हुए गुरुद्वारा श्री बेर साहिब पहुंची। साल 2002 के करीब सुल्तानपुर लोधी से बटाला तक पैदल बारात रूपी नगर कीर्तन की शुरुआत हुई।

100 साल पहले से निकालते आ रहे हैं नगर कीर्तन, 2005 से सुल्तानपुर लोधी से बटाला तक ही निकाला जाने लगा

2005 में सुखमणि साहिब सेवा सोसायटी के प्रधान एडवोकेट रजिंदर सिंह पदम व ज्ञानी हरबंस सिंह के सहयोग से सुल्तानपुर लोधी से बटाला तक विशाल बारात रूपी नगर कीर्तन सजाया गया। इस बार नगर कीर्तन 12 सितंबर को सुबह 7 बजे गुरुद्वारा बेर साहिब से आरंभ होगा। देर शाम को गुरुद्वारा सत करतारिया बटाला में पहुंचेगा। रात को विश्राम के बाद सुबह 7 बजे डेरा साहिब से नगर कीर्तन की शुरुआत होगी। यह नगर कीर्तन अलग-अलग क्षेत्रों से होता हुआ गुरुद्वारा श्री कंध साहिब पहुंचेगा। जहां पर शब्द कीर्तन व आनंद कारज का पाठ होगा।

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