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पुलिस प्रशासन की कवायद: अब एसएसपी पब्लिक विंडो पर आने वाली शिकायतों का होगा ऑनलाइन निपटारा

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चंडीगढ़4 मिनट पहलेलेखक: विनीत राणा

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इस प्रोजेक्ट को फोरम डिजिट कंप्लेंट मैनेजमेंट एंड इंक्वायरी पॉलिसी नाम दिया गया है।

यदि किसी प्रकार की एसएसपी पब्लिक विंडो पर शिकायत दी है और उस शिकायत का क्या स्टेट्स है और कहां तक मामले की जांच गई इस प्रकार की तमाम जानकारियां अब कंप्यूटर स्क्रीन पर देख पाएंगे। यही नहीं शिकायत की जांच कर रहे केस इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और पुलिस हेड क्वार्टर में बैठे उच्चाधिकारी अपनी स्क्रीन पर उस शिकायत से संबंधित तथ्य की भी जानकारी ले सकेंगे, क्याेंकि पुलिस विंडो पर आने वाली शिकायतों का पुलिस डिपार्टमेंट ऑनलाइन डिजिटाइजेशन करने जा रहा है और इस प्रोजेक्ट को नाम दिया है फोरम डिजिट कंप्लेंट मैनेजमेंट एंड इंक्वायरी पॉलिसी।

डिपार्टमेंट में इस समय बहुत सी यूनिट्स है जो अपना-अपना काम कर रही है। फिर चाहे वह ईओडब्ल्यू विंग हो, क्राइम ब्रांच हो, ट्रैफिक यूनिट हो या फिर सिक्योरिटी वूमेन सेल आदि यूनिट हो। डीजीपी संजय बेनिपाल ने शुक्रवार को इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी। इसमें संबंधित एसपी/एसएसपी पूरे मामले को मॉनीटर करेंगे कि किस शिकायत का क्या स्टेट्स है।

इसके साथ ही कंप्यूटर सेक्शन इंक्वायरी ऑफिसर को तमाम तरह की ट्रेनिंग देंगे और डीएसपी ट्रेनिंग सभी आईओ के ट्रेनिंग सेशन लेकर उन्हें एक्सपर्ट बनाया जाएगा, जिस पर एसपी हेड क्वार्टर की नजर रहेगी और ट्रेनिंग मेन्युअल करने की जिम्मेदारी होगी। उद्देश्य साफ है कि इंक्वायरी ऑफिसर यानि कि आईओ ऑनलाइन इंक्वायरी करने में एक्सपर्ट हो जाए।

आईओ को स्मार्ट डिवाइस मुहैया करवाए जाएंगे: इसको लेकर बाकायदा स्टैंडिंग आर्डर किए गए हैं। बताया कि इस प्रोजेक्ट को लाने का मकसद इंक्वायरी सिस्टम को ऑनलाइन करना है। ताकि शिकायतों का निपटारा जल्द और भ्रष्टाचार मुक्त हो। इसके लिए संबंधित इंक्वायरी ऑफिसर को डिपार्टमेंट की तरफ से ऑनलाइन की सुविधा से जुड़े तमाम उपकरण मुहैया करवाए जाएंगे। साथ ही इसमें ऑफ लाइन फीचर भी होगा जहां पर इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है या फिर है ही नहीं। वहां पर भी यह सिस्टम काम करेगा।

डिपोजल का रिकार्ड भी रहेगा सुरक्षित: यदि कोई शिकायत डिस्पोज ऑफ यानि कि खत्म करनी होगी तो उसके लिए यूनिट और विंग के संबंधित एसपी और एसएसपी के निर्देशों पर करना होगा। डिस्पोज शिकायत भी एचएसी ब्रांच के रिकार्ड रुम में सेव रहेगी। इसी प्रकार पुलिस की सीआरयू यूनिट मात्र वहीं इंक्वायरी देखेगी जोकि डीआईजी की तरफ से मार्क की होगी।

पुलिस डिपार्टमेंट की ब्रांच/यूनिटस के एक्सपर्ट आईओ जोकि शिकायतों की जांच करेंगे। इनमें आर्थिक अपराध से जुड़े मामले ईओडब्ल्यू, क्राइम ब्रांच जिसमें इंटरस्टेट गैंग, आर्गेनाइजड क्राइम, हथियारों से जुड़ा क्राइम, नार्कोटिक्स आदि शामिल है।

सीसीआईसी साइबर से जुड़ा क्राइम, ट्रैफिक से जुड़ी तमाम शिकायतें, सिक्योरिटी ब्रांच सुरक्षा मुहैया करवाने सबंधी शिकायतें, वूमेन सेल जिसमें महिलाओं की शादी, डाऊरी से जुड़े मामले, ऑपरेशन सेल आंतकवाद से जुड़ी तमाम शिकायतें, पीसीसी शिकायतें जिनमें पुलिस मुलाजिमों से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायतें शामिल है।

क्लाउड सर्वर में स्टोर रहेगा डाटा
बाकायदा इंक्वायरी के मामलों की फाइनल रिपोर्ट क्या है और उसका स्टेट्स क्या है यह सब डिपार्टमेंट के एनआईसी के क्लाउड सर्वर में सुरक्षित रहेगा। साथ ही उस रिपोर्ट के साथ किसी न कोई छेड़छाड़ की या उसको बदलता है तो वह भी सर्वर में सेव हो जाएगा। बाकायदा इसके लिए इंक्वायरी ऑफिसर को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें स्मार्ट डिवाइस चलाने से लेकर उसको हैंडल करना सब कुछ बारीकी से बताया जाएगा।
इन निर्देशों के अनुसार पुलिस हेड क्वार्टर में बनाई गई पब्लिक विंडो में जो भी शिकायत मेल से, वाय हैंड या फिर किसी ओर तरीके से आए उनको यूनिक आईडी नंबर दिया जाएगा और फिर डीआईजी को दिखाकर संबंधित यूनिट को भेजा जाएगा। यदि कोई ऐसा मामला हो जिसमें तुरंत एफआईआर दर्ज करनी हो तो उसमें तुरंत संबंधित पुलिस स्टेशन को भेज कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

पहले क्या होता था, जो अब नहीं होगा

इससे पहले जब पब्लिक विंडो पर कोई भी शिकायत आती थी तो उसको यूनिक नंबर लगाकर संबंधित पुलिस स्टेशन या ब्रांच/यूनिट को भेज दिया जाता था, जिसमें इंक्वायरी आफिसर का काफी समय लगता था और मामले ज्यादा होने के कारण इंक्वायरी लंबी चलती थी। उसके बाद उसकी फाइल तैयार कर संबंधित अफसरों को जांच के लिए भेजी जाती थी।

किसी शिकायतकर्ता को अपनी इंक्वायरी का स्टेट्स जानने के लिए अफसरों के पास जाना पड़ता था और फिर पीए को बाेलकर संबंधित आईओ से पूछकर बताते थे। लेकिन अब नए ऑनलाइन सिस्टम से एक तो आईओ का लिखने का काम खत्म हो जाएगा, दूसरा पूरा सिस्टम ऑनलाइन होने के कारण उच्चाधिकारी अपने लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन पर ही तुरंत मामले का स्टेट्स चेक कर पाएंगे।

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