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‘नीड बेस्ड चेंज’ का मुद्दा: दशकों बाद सीएचबी की मीटिंग में शामिल, यह 60,000 परिवारों की जरूरत, बैठक 8 सितंबर को

Punjab

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चंडीगढ़एक दिन पहले

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परिवार बढ़ा, तो कमरा बड़ा करने की जरूरत महसूस हुई और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में रहने वाले करीब 60 हजार परिवारों ने अपनी ‘जरूरत के हिसाब से कुछ बदलाव’ कर लिए। दशकों से इन बदलावों को रेगुलराइज करने की मांग की जाती रही है, लेकिन सीएचबी ने इन्हें मंजूरी नहीं दी है। लेकिन अब सूरत कुछ बदलती नजर आ रही है- अलॉटीज की लगातार मांग के बाद अगले हफ्ते होने वाली सीएचबी की मीटिंग में पहली बार नीड बेस्ड चेंजेज का मुद्दा शामिल किया जा रहा है।

अगर प्रशासन दिल्ली पैटर्न पर कुछ छूट दे देता है तो 95 फीसदी परिवारों को राहत मिल जाएगी। सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग कहते हैं- इस बार की सीएचबी की मीटिंग में नीड बेस्ड चेंजेज को लेकर एजेंडा रखा है। बोर्ड मेंबर्स की मौजूदगी में ही आगे तय किया जाएगा कि किस तरह से इसको सुलझाने के लिए बढ़ सकते हैं।

ये मुद्दा इसलिए बड़ा…
64,000 परिवार रहते हैं सीएचबी के मकानों में
90% से ज्यादा ने मकानों में कुछ न कुछ बदलाव किए हैं
50% लोगों को वॉयलेशन के नोटिस दिए गए हैं
दिक्कत ये… लोग जिन बदलावों को ‘नीड बेस्ड चेंजेज’ कहते हैं वो प्रशासन के लिए वॉयलेशन है। सीएचबी मेंबर प्रेम कौशिक कहते हैं- लोगों की लगातार मांग थी कि इस पर फैसला हो। हमारी कोशिश यही होगी कि दिल्ली पैटर्न पर कुछ साॅल्यूशन निकले, क्योंकि हजारों परिवारों से जुड़ा मुद्दा है।

भास्कर एक्सप्लेनर: पॉलिसी ही बनानी पड़ेगी
बरसों मंजूरी नहीं मिली, अभी अचानक इसे एजेंडे में कैसे शामिल किया जा रहा है?

-जून में पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनोर से कुछ अलाॅटियों ने मुलाकात की थी। उनका पक्ष जानने के बाद बदनोर ने प्रशासन को इस मामले को देखने को कहा था। पूर्व एडवाइजर मनोज परिदा ने 18 जून को सभी अफसरों और सीएचबी रेजिडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन की मीटिंग रखी थी। लेकिन 17 जून को ही परिदा की ट्रांसफर के ऑर्डर हो गए, इसलिए ये मीटिंग नहीं हो पाई। उधर, मकान बचाओ कमेटी ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाया। केंद्र से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा गया। उसके बाद से अब बोर्ड की मीटिंग हो रही है जिसके एजेंडे में मकान बचाओ कमेटी के लेटर को भी विचार करने के लिए लगाया गया है।

नीड बेस्ड चेंजेज को मंजूरी मिले तो कितना चार्ज या पेनल्टी लगेगी?
-फरवरी 2019 में कुछ नीड बेस्ड चेंजेज को रेगुलराइज करने के लिए प्रशासन ने नोटिफिकेशन की थी, लेकिन इसमें सभी अलॉटी कवर नहीं हो पा रहे थे। अब अगर दिल्ली पैटर्न पर मंजूरी मिलती है तो वन टाइम चार्जेज लग सकते हैं। पहले 150 वर्ग फुट की एडिशनल कंस्ट्रक्शन को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी गई, लेकिन 200 रुपए प्रति वर्ग फुट की फीस रखी गई थी। अगर मंजूरी मिलती है तो एडिशनल कंस्ट्रक्शन पर इसी तरह से नाॅर्मल चार्जेज देना पड़ सकता है।

नीड बेस्ड चेंजेज पर मंजूरी वन टाइम सैटलमेंट होगी या मंजूरी के लिए पाॅलिसी बनेगी?
-नीड बेस्ड चेंजेज का मुद्दा अगर बोर्ड की मीटिंग में मंजूर भी हो जाता है तो भी इसके लिए पाॅलिसी ही बनानी पड़ेगी। इसके पहले मकानों की इंस्पेक्शन होगी, एडिशनल कंस्ट्रक्शन और एन्क्रोचमेंट को देखने के लिए सर्वे किया जाएगा।

दूसरी हाउसिंग सोसाइटीज भी ऐसी ही मांग करने लगें तो…?
-हां, ऐसा हो सकता है। फैसले का असर दूसरी हाउसिंग सोसाइटीज जहां जरूरत मुताबिक बदलाव किए गए हैं वहां पर भी होगा, क्योंकि वे इसी आधार पर मंजूरी मांग सकते हैं।

दिल्ली पैटर्न कर देते हैं तो…
1. लोगों को कन्सेशन मिलेगी, एडिशनल कंस्ट्रक्शन नाॅर्मल फीस के साथ मंजूर की जाएगी। हालांकि ये रेगुलराइज नहीं होगी बल्कि वन टाइम सैटलमेंट काॅन्सेप्ट के साथ इसको मंजूर किया जा सकेगा।
2. सरकारी जमीन पर कई अलाॅटियों ने कंस्ट्रक्शन कर ली है, उनको वन टाइम चार्जेज के साथ मंजूर किया जा सकता है। लेकिन इस तरह की कंस्ट्रक्शन को न तो रेगुलराइज किया जाएगा और न ही इस पर अलाॅटी का कोई कानूनी अधिकार होगा।
3. डाॅक्यूमेंट्स देने होंगे, जिसमें पहले मकान की ओनरशिमप का डॉक्यूमेंट, दूसरा ये कि संबंधित मकान पर कोई कानूनी विवाद नहीं है, मकान का मैप और सिक्योरिटी आॅफ स्ट्रक्चर का सर्टिफिकेट।

लीज होल्ड कमर्शियल प्राॅपर्टी रिजर्व प्राइस हो सकती है कम
दूसरा बड़ा एजेंडा इस मीटिंग के लिए बोर्ड की कमर्शियल लीज होल्ड प्राॅपर्टी की रिजर्व प्राइस कम करने का रखा गया है। दरअसल करीब 147 दुकानें मनीमाजरा व अलग-अलग जगहों पर हैं। इनको ऑक्शन पर लगाया जा रहा है, लेकिन लोग इन्हें खरीदने में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कारण- इनकी रिजर्व प्राइस ज्यादा है। एडवाइजर धर्मपाल खुद भी हाल ही में अलग-अलग मार्केट्स की विजिट करके आए हैं। बोर्ड मेंबर्स ने भी अलग-अलग मार्केट्स का दौरा किया था, जिसके बाद इनकी रिजर्व प्राइस को कम करने पर फैसला किया जा सकता है।

ट्राईसिटी में स्टेटस
चंडीगढ़ : बेटों की शादी हुई तो कमरे बढ़ाए

सेक्टर-45 के एक रेजिडेंट के तीन बेटे हैं, दो की शादी हो गई तो अलग कमरे की जरूरत थी। बैकयार्ड में जगह थी, दो दीवारें खड़ी कर टेम्परेरी अरेंजमेंट किया। प्रशासन इसे वॉयलेशन माना जाता है। जबकि अगर ये रूम मंजूर हो जाए तो हमारे एक बेटे को अलग से घर किराये पर लेने की जरूरत नहीं होगी।

मोहाली: पूरे शहर के लिए यूनिफॉर्म पॉलिसी की मांग
करीब 4500 बिल्ट-अप मकान हैं जो नीड बेस्ड चेंजेज के तहत मंजूरी मांग रहे हैं। ये तीन दशक पहले अलाॅट हुए थे, अब परिवार बड़े हो चुके हैं, उन्हें ज्यादा जगह चाहिए। ज्यादातर में एडिशनल कंस्ट्रक्शन है, जिसे वे रेगुलराइज करवाना चाहते हैं। पंजाब हाउसिंग डिपार्टमेंट ने कुछ एरिया में नीड बेस्ड चेंजेज को मंजूर किया है, लेकिन लोग पूरे शहर के लिए यूनिफाॅर्म पाॅलिसी चाहते हैं।

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करीब 4500 बिल्ट-अप मकान हैं जो नीड बेस्ड चेंजेज के तहत मंजूरी मांग रहे हैं। ये तीन दशक पहले अलाॅट हुए थे, अब परिवार बड़े हो चुके हैं, उन्हें ज्यादा जगह चाहिए। ज्यादातर में एडिशनल कंस्ट्रक्शन है, जिसे वे रेगुलराइज करवाना चाहते हैं। पंजाब हाउसिंग डिपार्टमेंट ने कुछ एरिया में नीड बेस्ड चेंजेज को मंजूर किया है, लेकिन लोग पूरे शहर के लिए यूनिफाॅर्म पाॅलिसी चाहते हैं।

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