Global Statistics

All countries
240,226,016
Confirmed
Updated on October 14, 2021 7:09 pm
All countries
215,798,951
Recovered
Updated on October 14, 2021 7:09 pm
All countries
4,893,452
Deaths
Updated on October 14, 2021 7:09 pm

Global Statistics

All countries
240,226,016
Confirmed
Updated on October 14, 2021 7:09 pm
All countries
215,798,951
Recovered
Updated on October 14, 2021 7:09 pm
All countries
4,893,452
Deaths
Updated on October 14, 2021 7:09 pm

नए मंत्रिमंडल से कांग्रेस हाईकमान का स्पष्ट संदेश: अमरिंदर अब पंजाब में पार्टी के ‘कैप्टन’ नहीं, सबसे करीबी रहे 5 मंत्रियों को ही हटाया; 7 नए चेहरों में सभी एंटी कैप्टन

Punjab

इलाज के दौरान जख्मी युवक की मौत: ट्रांसपोर्ट नगर में 4 दिन पहले हुई थी मारपीट, हत्या का पर्चा दर्ज

Smart Newsline (SN) Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join) लुधियानाएक दिन पहलेकॉपी लिंकट्रांसपोर्ट नगर में 4 दिन पहले...

कोविड अपडेट: कोविड के 2 नए केस एक मरीज की मौत

Smart Newsline (SN) Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join) लुधियानाएक दिन पहलेकॉपी लिंकवीरवार को जिले में कोविड के...

अगले सप्ताह होगी एफएंडसीसी: रोज गार्डन में म्यूजिकल फाउंटेन शुरू करने, एलिवेटेड रोड के मेंटेनेंस समेत 400 प्रस्ताव होंगे मंजूर

Smart Newsline (SN) Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join) लुधियाना20 घंटे पहलेकॉपी लिंकशहर की सड़कों काे नया रूप...

Smart Newsline (SN)

Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join)

जालंधर41 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

कैप्टन अमरिंदर सिंह। फाइल फोटो

कांग्रेस हाईकमान ने CM कुर्सी से हटाने के बाद मंत्रिमंडल में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर दिया। पहले चुन-चुनकर उनके करीबियों की मंत्रिमंडल से छुट्‌टी कर दी । उसके बाद जो नए चेहरे शामिल किए, सभी एंटी कैप्टन खेमे के हैं। कांग्रेस हाईकमान ने साफ संदेश दे दिया कि पंजाब में पार्टी के भविष्य की राजनीति से कैप्टन अब नहीं होंगे। कैप्टन ने भी राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को अनुभवहीन बता हाईकमान के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। जिसका असर अब साफ तौर पर नजर आया है। कैप्टन भी मंत्रिमंडल की घोषणा का इंतजार कर रहे थे। अब वह क्या नया कदम उठाएंगे, इसको लेकर सबकी नजर कैप्टन पर लगी है।

जानिए नए चेहरों के बारे में

  • राणा गुरजीत : कैप्टन के करीबी थे। 2017 में सरकार बनी तो वह कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद रेत-बजरी को लेकर आरोप लगे। कैप्टन ने उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया। उन्होंने समय का रुख देख सिद्धू ग्रुप से तालमेल कर लिया। अब वह वापस लौट आए हैं। हालांकि उन्हें दोबारा शामिल करने को लेकर सियासी विरोध हो सकता है।
  • परगट सिंह : ओलिंपिक में हॉकी टीम के कैप्टन रहे परगट को सुखबीर बादल राजनीति में लाए। हालांकि मंत्री पद नहीं दिया। परगट अकाली छोड़ कांग्रेसी बन गए। विधायक भी बने लेकिन कैप्टन ने मंत्री नहीं बनाया। जिसके बाद वो कैप्टन से बागी हो गए। पिछले ढ़ाई साल से कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था। सिद्धू के करीबी हैं।
  • गुरकीरत कोटली : पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह के परिवार से हैं। पहले बेअंत सिंह के बेटे तेजप्रकाश कोटली सियासत में चढ़ाई पर थे। वह आगे बढ़ते तो पिता की विरासत की वजह से CM की कुर्सी के बड़े दावेदार होते। कैप्टन ने रवनीत बिट्‌ट को प्रमोट किया। इस बीच गुरकीरत कोटली पीछे छूट गए। कैप्टन के वक्त अनदेखी होती रही। वक्त बदलता देख सिद्धू के साथ जा मिले।
  • कुलजीत नागरा : शुरु से ही कैप्टन के विरोधी रहे हैं। कैप्टन के आलोचक विधायक परगट सिंह वाले ग्रुप में ही शामिल थे। सिद्धू के प्रधान बनते ही उन्हें भी पंजाब कांग्रेस का वर्किंग प्रधान बना दिया गया।
  • राजकुमार वेरका : कैप्टन के करीबी रहे हैं। 2017 में मंत्री नहीं बनाया गया। तब उन्होंने नाराजगी जताई थी। उन्हें कैप्टन ने कैबिनेट रैंक भी दिया था। हालांकि मंत्री नहीं बनाया गया। वह अनुसूचित जाति से दिग्गज नेता हैं। डिप्टी सीएम के दावेदार थे। चरणजीत चन्नी CM बन गए तो उन्हें मंत्री बना दिया गया।
  • संगत सिंह गिलजियां : कैप्टन 2002-07 तक CM रहे। जब 2007 में दोबारा चुनाव हुए तो कैप्टन ने टांडा उड़मुड़ से उनकी टिकट काट दी। कैप्टन CM थे तो टिकट बंटवारे में उनकी ही चली। गिलजियां बागी होकर आजाद लड़े और फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। हालांकि कैप्टन से नाराजगी बरकरार रही।
  • अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग : राहुल गांधी के करीबी हैं और यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रधान रह चुके हैं। कैप्टन के विरोध के बावजूद सिद्धू को जिस टीम ने प्रधान बनाया, वड़िंग उस टीम में शामिल थे। वड़िंग को मंत्री बनाने की एक और वजह मनप्रीत बादल भी हैं। मालवा इलाके में पार्टी मनप्रीत के बराबर कोई नेता चाहती थी, जो अब वड़िंग के रूप में मिल गया। मनप्रीत ने उनका विरोध भी किया था।

पुराने चेहरे : कुछ के तार हाईकमान से जुड़े, बाकियों को कैप्टन के विरोध का फल

  • मनप्रीत बादल : नॉन कंट्रोवर्शियल हैं। उन्होंने राहुल गांधी के साथ एक ही दून स्कूल में पढ़ाई की है। पंजाब में पूर्व CM परकाश सिंह बादल परिवार को चुनौती देने के लिए मनप्रीत बादल अहम हैं। चरणजीत चन्नी को CM पद मिलने में भी हाईकमान को राजी करने मनप्रीत ने अहम भूमिका निभाई।
  • ब्रह्ममोहिंदरा : पटियाला से बड़े नेता हैं। कैप्टन के करीब रहे हैं लेकिन अगर पटियाला से वो हटाए जाते तो कैप्टन का दबदबा बना रहता। कैप्टन पटियाला के ही हैं। ऐसे में ब्रह्ममोहिंदरा को मंत्री पद से पटियाला की राजनीति में भी सिद्धू ग्रुप की मौजूदगी रहेगी। कैप्टन इस मुद्दे को पटियाला में भुना सकते थे। ब्रह्ममोहिंदरा को पहले डिप्टी सीएम बना रहे थे लेकिन अंतिम वक्त में ओपी सोनी को बना दिया गया।
  • विजयेंद्र सिंगला : कैप्टन के करीबी रहे लेकिन परफार्मेंस बेहतर रही। उनके एजुकेशन मंत्री रहते पंजाब स्कूल एजुकेशन में नंबर वन घोषित हुआ। सिंगला को बाहर निकालते तो यह सवाल जरूर उठता। उन्हें काम का फल मिल गया। उन्हें राहुल का करीबी माना जाता है।
  • भारत भूषण आशु : सुनील जाखड़ व राहुल गांधी के करीबी हैं। पहले प्रताप सिंह बाजवा के गुट में रहे हैं। हालांकि कैप्टन सरकार में हाईकमान की मर्जी से मंत्री बने। लुधियाना की सियासत में अहम बात यह भी है कि विधायक राकेश पांडे कैप्टन के करीबी हो गए। उनके बेटे को रेवेन्यू डिपार्टमेंट में नौकरी दी गई। आशु के जरिए पार्टी ने यह सियासत साध ली।
  • रजिया सुल्ताना : सिद्धू के सलाहकार पूर्व DGP मुहम्मद मुस्तफा की पत्नी हैं। कैप्टन ने जब सिद्धू को एंटी-नेशनल कहा तो मुस्तफा ने अमरिंदर का खुला विरोध किया था।
  • अरुणा चौधरी : कैप्टन सरकार में मंत्री रहीं, इस बार कुर्सी जाने की चर्चा थी। हालांकि अनुसूचित जाति को तरजीह न मिलने पर कैप्टन के खिलाफ नाखुशी जता चुकी हैं। CM चरणजीत चन्नी से रिश्तेदारी ने उनकी वापसी करवा दी।
  • तृप्त राजिंदर बाजवा व सुख सरकारिया : कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने की बगावत करने वाले विधायकों की अगुवाई करने वालों में शामिल थे।

जिनको हटाया…. कैप्टन के लिहाज से उनका गणित

  • राणा गुरमीत सोढ़ी : कैप्टन के करीबी हैं। जब कैप्टन के खिलाफ बगावत हुई तो अपने घर डिनर रखा। जिसमें 58 विधायकों को बुलाकर शक्ति प्रदर्शन किया। सिद्धू प्रधान बने तो खुलकर कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ चले। चुनाव कैप्टन की अगुवाई में लड़ने के हरीश रावत के बयान का खूब प्रचार किया।
  • साधु सिंह धर्मसोत : कैप्टन के करीबी मंत्री रहे। पोस्टमैट्रिक स्कॉलरशिप के घोटाले के आरोप से घिरे। काफी विरोध भी हुआ लेकिन कैप्टन ने कोई कार्रवाई नहीं की। पार्टी के पूर्व प्रधान शमशेर दूलो तक खिलाफ हो गए। विरोधी भी निशाना बना रहे थे, इसलिए दोबारा मंत्री न बना सियासी तौर पर वो मुद्दा खत्म कर दिया।
  • बलवीर सिद्धू : सिद्धू के प्रधान बनने के बाद खुलकर उनके साथ नहीं चले। कैप्टन से करीबी बरकरार रही। एक चर्चा यह भी है कि CM चरणजीत चन्नी भी मोहाली में रहते हैं और बलवीर सिद्धू भी। ऐसे में वहां से दूसरा मंत्री नहीं बनाया गया। अंबिका सोनी के कहने पर सीधे मंत्री बने थे। अंबिका सोनी के कहने पर सीधे मंत्री बने थे।
  • गुरप्रीत कांगड़ : शुरू से कैप्टन के करीबी रहे हैं। कैप्टन के कहने पर हर बार टिकट मिली। सिद्धू के साथ खुलकर नहीं चले। हाल ही में जब दामाद को कैप्टन कैबिनेट ने सरकारी नौकरी की मंजूरी दी तो सिद्धू ग्रुप को खटक गए।
  • शाम सुंदर अरोड़ा : कैप्टन के करीबी रहे हैं। अक्सर सिसवां फार्म हाउस में आना-जाना था। उन पर जमीन को लेकर घोटाले के आरोप थे। अरोड़ा ने आरोप नकारे लेकिन विरोधी इसे मुद्दा बनाकर उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग करते रहे। अरोड़ा को भी अंबिका सोनी की सिफारिश की वजह से पहले मंत्री बनाया गया था।

खबरें और भी हैं…

For breaking news and live news updates, like Smart Newsline on Facebook or follow us on Twitter & Whatsapp

Hot Topics - Haryana

रिकार्डतोड़ बारिश के बाद लौटा मानसून: 16 से फिर हल्की बारिश के आसार, सरसों की बिजाई रोक लें किसान

Smart Newsline (SN) Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join) हिसार14 घंटे पहलेकॉपी लिंकइस साल मानसून सीजन में राज्य...

Related Articles - Delhi NCR

चिंता का विषय: बढ़ते प्रदूषण को लेकर अभी नहीं किए जा रहे कोई उपाय, दूसरे दिन बल्लभगढ़ दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा

Smart Newsline (SN) Get Latest News from Smart Newsline on Whatsapp (Click to Join) फरीदाबाद2 घंटे पहलेकॉपी लिंकशहर में प्रदूषण का स्तर लगातार...