चीन के कारण जोधपुर में हैंडीक्राफ्ट के बिजनेस पर संकट: एक्सपोर्ट की राह में रुकावट बन रही कंटेनर की कमी, लेबर नहीं होने से चीन में पड़े; भाड़ा आसमान छूने लगा

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जोधपुरएक घंटा पहले

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फाइल फोटो।

जोधपुर हैंडीक्राफ्ट उद्योग में जून के बाद फिर हालात बिगड़ गए हैं। इसका बड़ा कारण कंटेनर की कमी है। खाली कंटेनर नहीं होने से एक्सपोर्टर माल भेजने में असमर्थ हैं। डिले होने के चलते विदेशी ग्राहक ऑर्डर को होल्ड कर रहे हैं। साथ ही कुछ केंसिल कर रहे हैं। ऐसे में जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट उद्योग प्रभावित हो रहा है। इधर कंटेनर की कमी के कारण शिपिंग कम्पनियों ने भाड़ा बढ़ा दिया। यह भाड़ा एक दो नहीं चार गुना बढ़ा है। ऐसे में बढा हुआ भाड़ा एक्सपोर्टर वहन नहीं कर पा रहे। इस बढ़े भाड़े के चलते माल की लागत भी बढ़ रही है। महंगा माल विदेशी ग्राहक लेना नहीं चाह रहे। कुल मिलाकर हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर गहरा संकट छाया हुआ है। इसका समाधान किसी के पास नहीं। क्योंकि भारत की कोई बड़ी शिपिंग कम्पनी नहीं है। जिससे यह संकट मिटा सके। न ही विश्व स्तर पर कोई ऐसी कमेटी गठित है। शिपिंग कम्पनियों के भाड़े को कंट्रोल करने के नीयम बना सके।

यह है बड़ा कारण

चीन देश की बड़ी शिपिंग कंम्पनियों को कंट्रोल करता है। वहीं चीन से माल आयात नहीं होने से चीन में कंटेनर माल से भरे हुए वहीं स्टोर हो गए। चीन का कहना है कि कोरोना के बाद लेबर की कमी के चलते कंटेनर खाली नहीं हो पा रहे हैं। इससे कंटेनर वहीं स्टॉक हो गए। खाली कंटेनर वापस नहीं आने पर मार्केट में कंटेनर की कमी आ गई। इधर भारत के पास कंटेनर निर्माण करने वाली कोई कंपनी नहीं है। ऐसे में कंटेनर की कमी के चलते देश भर के सभी एक्सपोर्ट बिजनस प्रभावित होने के साथ जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर भी प्रभावित हो रहे है।

जोधपुर को चाहिए हर माह 6500 कंटेनर

जोधपुर हैंडीक्राफ्ट का हब है। विश्व में जोधपुर के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का एकाधिकार है। जोधपुर की छोटी से बड़ी इंडस्ट्री अपना माल एक्सपोर्ट करती है। ऐसे में अकेला जोधपुर 6500 कंटेनर का हर महिने उपयोग करता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक्सपोर्टर को एक कंटेनर भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ज्यादा ही जरुरत होने पर उसे उसका भाड़ा कई गुना अधिक चुकाना पड़ रहा है।

जोधपुरी हैण्डीक्राफ्ट।

जोधपुरी हैण्डीक्राफ्ट।

हर माह 400 करोड़ का टर्न ओवर

जोधपुर में हैंडीक्राफ्ट व्यवसाय को मासिक टर्न ओवर 400 करोड़ से अधिक है। पूरा बिजनेस एक्सपोर्ट पर टिका है। इधर माल एक्सपोर्ट नहीं होने से करोड़ों रुपए का घाटा बिजनेसमैन को उठाना पड़ रहा है। छोटे व्यापारियों पर यह संकट ज्यादा गहरा असर छोड़ रहा है। कोरोना से पहले से ही प्रभावित छोटे बिजनसमैन अपने उद्योग को बंद करने के कागार पर है।

चार गुना किराए पर भी बुकिंग संभव नहीं

अप्रैल 2020 में 40 फीट कंटेनर के लिए 900 यूएस डॉलर खर्च करने होते थे। वर्तमान में यह यूरोपीय बंदरगाहों के लिए 7000 यूएस डॉलर हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट के लिए पहले यह 1600 यूएसडी था जो अब बढ़कर 12000 यूएसडी हो गया है। उपरोक्त बढ़ी हुई दरों पर भी आसानी से बुकिंग नहीं मिलती।

हैण्डीक्राफ्ट व्यवसायी निर्मल भंडारी का कहना है कि कंटेरन की कमी और बढ़ते दाम ने स्थिति बिगाड़ रखी है। कंटेनर उपलब्ध ही नहीं तो माल कैसे एक्सपोर्ट हो। छोटे व्यवसायी ज्यादा परेशान है।

कस्टम ब्रोकर इकॉनोमिक हेंडलिंग एजेंसी के ऑनर विरेन्द्र सिंघवी का कहना है कि कंटेनर की कमी देश भर के एक्पोर्टर को प्रभावित कर रही है। जोधपुर से हर माह 6500 कंटेनर माल एक्सपोर्ट होता था। लेकिन यह सब अटक गया है। बढ़े दाम एक्सपोर्टर को प्रभावित कर रहे है। शिपिंग कम्पनियों के किराए को कंट्रोल करने के लिए एक काउसिंल बननी चाहिए। ताकि इस क्राइसेस में बिजनसमैन की बात भी सुने।

हैण्डीक्राफ्ट व्यवसायी पंकज भंडारी का कहना है कि यह सीजन एक्सपोर्ट का होता है। क्रिसमस पर हैण्डीक्राफ्ट का अच्छा निर्यात होता है लेकिन इस बार पूरा बिजनस इफेक्ट हुआ है। जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो इस घाटे से संभलना मुश्किल होगा।

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