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ग्राउंड जीरो से: 7 सीएचसी पर लगने थे 175 ऑक्सीजन बेड, लगे मात्र 40, तीन माह बीते, ऑक्सीजन तक की व्यवस्था न करवा पाए

Punjab

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पानीपत38 मिनट पहले

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समालखा. ऑक्सीजन प्लांट के नाम पर लगा जनरेटर का ढांचा।

  • जिले की 7 सीएचसी पर भास्कर की रिपोर्ट, आप भी जानें संभावित तीसरी लहर के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम
  • समालखा अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के नाम पर सिर्फ टीन का शेड

कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के लिए खतरा बताया जा रहा है। इसे देखते हुए जिले में अभी कोई व्यापक इंतजाम नहीं हैं। दूसरी लहर कम होने के बाद सरकार ने सभी सीएचसी पर 25-25 ऑक्सीजन बेड लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग साताें सीएचसी पर 25-25 ऑक्सीजन बेड नहीं लगा पाया। किसी में 4 बेड तैयार हैं तो किसी में 8 बेड ताे हैं पर ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है। इन केंद्रों पर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, शिशु राेग विशेषज्ञ सहित अन्य संसाधनाें की कमी बनी हुई है।

4 सीएचसी पर ताे जनरेटर तक नहीं है। सिविल अस्पताल में तीन महीनाें में सीएचसी के डाॅक्टराें काे ट्रेनिंग जरूर दी गई, लेकिन काेई नई मशीन या स्टाफ नहीं दिया गया। सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट शुरू हाे गया है, लेकिन समालखा में शुरू ही नहीं कर पाए। वहां 4 महीनाें से टिन शेड ही खड़ा है। बात करें ऑक्सीजन बेड की तो समालखा में 50, नारायणा व अहर में 8, मतलौडा में 4, बापौली और नौल्था में 10 बेड हैं। जबकि ददलाना व खैतपुरा में तो ऑक्सीजन बेड ही नहीं है। नारायणा सीएचसी को छोड़कर किसी के पास जनरेटर तक नहीं है।

संभलिए, 4300 बच्चे हाे चुके कोरोना संक्रमित

जिले की कुल आबादी 13 लाख 48 हजार 180 है। इनमें से 40 फीसदी आबादी 1 से 18 साल तक के बच्चाें की है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुल 5 लाख 39 हजार 320 बच्चे हैं। अब तक कोरोना से 4 हजार 300 से ज्यादा बच्चे कोरोना संक्रमित हाे चुके हैं। वहीं, 18 से नीचे उम्र के तीन बच्चाें की जान भी जा चुकी है। इसमें दाे 16-16 साल की लड़कियां और एक 18 साल का लड़का शामिल है। सवाल ये है कि तीसरी लहर में 5.39 लाख बच्चों को कैसे बचाएंगे, क्याेंकि जिले में प्रर्याप्त डाॅक्टर तक नहीं हैं। सिर्फ दाे बाल राेग विशेषज्ञ हैं।

बच्चाें काे बचाने केे लिए यह उपकरण हैं जरूरी

काेराेना से बच्चे तीन कैटेगरी में संक्रमित हाेते हैं। इसमें माल्ड, माॅडर्रेड और गंभीर होते हैं। माल्ड लक्षणाें वाले बच्चाें काे अस्पताल में एडमिट करने की जरूरत नहीं है। माॅडर्रेड के लक्षण वाले बच्चाें काे दवाओं और डाॅक्टराें की देख-रेख की जरूरत हाेेती है। वहीं, गंभीर मरीजाें काे अस्पताल में आईसीयू, वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ती हैै। एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चाें के लिए अलग वेंटिलेटर, माॅनिटर, ट्रेंड स्टाफ चाहिए। पीकू सबसे जरूरी है।

जानिए… जिले की सीएचसी काेराेना की संभावित तीसरी लहर से पहले कितनी तैयार

समालखा अस्पताल: 100 बेड के अस्पताल में मात्र 3 डाॅक्टर

100 बेड के समालखा अस्पताल में न नया ऑक्सीजन प्लांट लगा है, न वेंटिलेटर है। नए ऑक्सीजन प्लांट के नाम पर 20X20 फीट का टीन का ढांचा बनाकर खड़ा कर दिया। हालांकि यहां 6 हजार लीटर का ऑक्सीजन टैंक है। जिसमें मात्र एक हजार लीटर ऑक्सीजन है। 100 बेड पर मात्र 3 डाॅक्टर हैं।

नारायणा सीएचसी: इंचार्ज के अलावा कोई डॉक्टर नहीं

गांव नारायणा में बनी 30 बिस्तराें की सीएचसी में इंचार्ज सुशील के अलावा कोई डॉक्टर नहीं है। डॉ. सुशील ही मरीजों को देखते हैं। यहां भी 25 ऑक्सीजन बेड लगने थे, लेकिन सिर्फ 8 ऑक्सीजन बेड ही तैयार हुए हैं। यहां एक भी वेंटिलेटर और कंसंट्रेटर तक की सुविधा नहीं है।

अहर सीएचसी: अंधेरे में इलाज, जनरेटर तक की सुविधा नहीं

अहर सीएचसी में भी 25 बेड ऑक्सीजन के तैयार किए जाने थे, लेकिन अभी तक सिर्फ 8 बेड ऑक्सीजन के तैयार हाे पाए हैं। सीएचसी में मात्र दाे ही डाॅक्टर हैं। बिजली चले जाने पर यहां जनरेटर की काेई सुविधा नहीं है। सीएचसी में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, शिशु राेग विशेषज्ञ तक की कमी बनी है।

सिविल अस्पताल: दावा- सब व्यवस्थाएं पूरी हैं

सिविल अस्पताल में 6 बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट) वार्ड तैयार है। आईसीयू में 14 बेड हैं। 28 बेड का आइसोलेशन वार्ड है, जो 60 बेड का बनाना है। 30 नेजल प्रान, 16 नेबुलाइजर हैं। फिलहाल 31 वेंटिलेटर, जिनमें से मात्र 14 रनिंग में हैं। 75 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन रनिंग में हैं।

बापाैली सीएचसी: सबसे बड़ी सीएचसी, वेंटिलेटर एक भी नहीं

बापाैली सीएचसी जिले की सबसे बड़ी सीएचसी है। करीब 40 से 50 गांवाें में एकमात्र सीएचसी है। 6 डाॅक्टराेंं की पाेस्ट में से 4 पाेस्ट खाली पड़ी हैं। यहां 30 बेड में से सिर्फ 10 बेड काेविड के लिए तैयार किए गए हैं। 4 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। वेंटिलेटर ताे हैै ही नहीं। बस 15 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की व्यवस्था है।

ददलाना सीएचसी: सिर्फ 8 बेड लगे, तैयार काेई भी नहीं

ददलाना गांव में बनी सीएचसी में मात्र 8 बेड हैं, लेकिन काेविड के लिए काेई बेड तैयार नहीं है। क्याेंकि ऑक्सीजन ही नहीं है। ऑक्सीजन का सामान आए हुए 10 दिन हाे चुके हैं, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हुआ है। वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडराें की बहुत कमी बनी हुई है।

खाैतपुरा सीएचसी: सिर्फ 10 बेड, संसाधनाें की भी कमी

खाैतपुरा सीएचसी में दाे डाॅक्टर कार्यरत हैं। यहां संसाधनाें की बहुत कमी बनी हुई है। काेविड बेड तैयार नहीं किए गए हैं। डाॅक्टराें ने वेंटिलेटर चलाने सहित अन्य ट्रेनिंग जरूर ली है, लेकिन सीएचसी में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, शिशु राेग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर तक की कमी बनी हुई है।

मतलौडा सीएचसी: शिशु राेग विशेषज्ञ तक नहीं

मतलाैडा सीएचसी में वैसे ताे 30 बिस्तराें की व्यवस्था है, लेकिन मात्र 4 बेड ही ऑक्सीजन के तैयार हाे पाए हैं। सीएचसी में ऑक्सीजन कंसट्रेटर, शिशु राेग विशेषज्ञ, जनरेटर, ऑक्सीजन सिलेंडरऔर अन्य डाॅक्टराें की कमी बनी हुई है। पूरी सीएचसी की जिम्मेदारी एक ही डाॅक्टर पर है।

सीधी बात- डाॅ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन

Q. तीसरी लहर काे लेकर सीएचसी पर क्या तैयारी की गई है?
A. हमारी पूरी तैयारी हैं, डाॅक्टराें काे ट्रेनिंग दे रहे हैं, बेड की संख्या पर्याप्त है।

Q. वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर तक नहीं है ?
A. वेंटिलेटर नहीं लगेंगे सीएचसी में, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेंजेंगे।

Q. डाॅक्टराें और संसाधनाें की कमी क्यों बनी है?
A. डाॅक्टराें कमी जरूर है, संसाधन पर्याप्त हैं

Q. तीसरी लहर आ गई ताे कैसे निपटा जाएगा ?
A. 500 बेड का अस्पताल है, केस बढ़ेंगे ताे सुविधा बढ़ेगी

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