Wednesday, June 16, 2021

Multinational companies dissolve Chinese youth, because the future is insecure; Now government job competition | मल्टीनेशनल कंपनियों से चीन के युवाओं का माेह भंग, क्योंकि भविष्य असुरक्षित; अब सरकारी नौकरी की होड़

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रोज 12 घंटे काम; सैलरी भी कम, फिर भी सरकारी नौकरी ही चाहिए।

चीन की राजधानी बीजिंग में रहने वाली झू लिंग ने पिछले साल ग्रेजुएशन किया है। देश की सबसे बेहतर यूनिवर्सिटी में से एक में पढ़ाई के बाद उन्हें अच्छी सैलरी वाली जॉब मिल रही थी, लेकिन झू सिर्फ सरकारी नौकरी करना चाहती हैं। इसके लिए वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। कुछ ऐसा ही हाल चीन के ज्यादातर युवाओं का है। उनमें भविष्य को लेकर असुरक्षा इस कदर बढ़ गई है कि अब वे सरकारी नौकरी के अलावा और कुछ नहीं करना चाहते।

5 साल पहले तक चीन के युवाओं में अलीबाबा, टेन्सेंट, ह्युवेई जैसी बड़ी कंपनियां ज्वाइन करने की होड़ थी। इसकी वजह बेहतर सैलरी, वर्क कल्चर और युवाओं को अधिक मौके मिलना थी। लेकिन महामारी के बाद इसमें बदलाव दिख रहा है। मल्टीनेशनल कंपनियों से उनका मोह भंग हो रहा है। वे अब बैंक, स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सरकारी नौकरी तलाश रहे हैं।

इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 25,700 पदों के लिए हुई परीक्षा में 16 लाख युवा शामिल हुए। यह पिछली बार से डेढ़ लाख ज्यादा है। झू कहती हैं, ‘मल्टीनेशनल कंपनियां अच्छा पैसा देती हैं, दुनिया घूमने का मौका भी मिलता है। लेकिन आजकल एशियाई या चीन के लोगों के साथ भेदभाव दिखने लगा है। दूसरा, हमें वहां उच्च पदों पर पहुंचने का मौका नहीं मिलता, ज्यादा से ज्यादा मिडिल मैनेजमेंट तक पहुंच पाते हैं। वहीं जब कभी मंदी या कंपनी की वित्तीय स्थिति खराब होती है, तो सबसे ज्यादा शिकार हम ही होते हैं।’

औसत सैलरी 70 हजार, कई लोग इतनी जिम की फीस दे रहे
चीन में सिविल सर्वेंट यानी सरकारी कर्मचारी की औसत सैलरी करीब 70 हजार रुपए महीना है। निजी कंपनियों में काम करने वाले कई प्रोफेशनल तो इतना पैसा जिम की फीस के तौर पर चुका रहे हैं। लेकिन सुरक्षित भविष्य के कारण चीन के युवाओं में सरकारी नौकरी की लालसा बढ़ रही है।

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