Tuesday, June 22, 2021

‘Lady with the Lamp’ was born on this day, Florence Nightingale is celebrated in her honor, International Nurses Day | आज ही के दिन हुआ था ‘लेडी विद द लैंप’ फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म, उनके सम्मान में मनाया जाता है इंटरनेशनल नर्स डे

Must Read

Senior Qatari diplomat says Indian officials engaged in talks with Taliban | World News

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp A senior Qatari diplomat, involved in the Afghan...

Covid-19 vaccines losing effect against Delta variant, says WHO official | World News

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp Covid-19 vaccines are showing signs of reduced efficacy...

Canada won’t open border fully until 75% people vaccinated | World News

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp The Canadian government announced a loosening of Covid-19...

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp

  • National
  • ‘Lady With The Lamp’ Was Born On This Day, Florence Nightingale Is Celebrated In Her Honor, International Nurses Day

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें Smart Newsline ऐप

आज इंटरनेशनल नर्स डे है। इस दिन को फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। नर्सिंग को एक सम्मानजनक पेशा बनाने का श्रेय फ्लोरेंस नाइटिंगेल को ही जाता है।

12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। उच्च वर्गीय परिवार में जन्मीं फ्लोरेंस के घर वालों को ये बिल्कुल मंजूर नहीं था कि उनकी बेटी नर्स बने, क्योंकि उस वक्त नर्सिंग को सम्मानित पेशा नहीं माना जाता था। आखिरकार फ्लोरेंस की जिद के आगे घर वालों को झुकना पड़ा और फ्लोरेंस को नर्सिंग की ट्रेनिंग के लिए जर्मनी जाने की इजाजत मिल गई। साल 1851 में वे जर्मनी गईं और 1853 में उन्होंने लंदन में महिलाओं के लिए अस्पताल खोला। इसी साल क्रीमिया का युद्ध शुरू हो गया। फ्लोरेंस 38 नर्सों को साथ लेकर तुर्की के एक मिलिट्री अस्पताल में सैनिकों की सेवा करने गईं।

अस्पताल में फ्लोरेंस ने गंदगी का पहाड़ देखा। उन्होंने सबसे पहले अपना ध्यान साफ-सफाई पर लगाया। उन्होंने घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल में दिन-रात एक कर दिया। वे रात में भी सैनिकों की सेवा में लगी रहती थीं। इस दौरान हाथ में लालटेन लेकर वह मरीजों को देखने जाती थीं, इसी कारण सैनिक उन्हें ‘लेडी विद द लैंप’ कहने लगे। जब फ्लोरेंस युद्ध के बाद लौटीं, तो उनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया था। आज भी पूरी दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है।

2008: चीन के सिचुआन में आया भीषण भूकंप

2008 में आज ही के दिन चीन में एक भयानक भूकंप ने हजारों लोगों को मौत को नींद सुला दिया था। सिचुआन प्रांत में आए इस भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 7.9 थी। भूकंप इतना खतरनाक था कि करीब 90 हजार लोग मारे गए। भूकंप का केंद्र दुजीआंग्यान शहर के करीब था। वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप जमीन में इंडियन-ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेट्स के टकराने की वजह से आया था। इस टक्कर की वजह से तिब्बत पठार में हलचल हुई और वो पूर्व की ओर खिसक गया। भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जमीन में कई जगह 9 मीटर तक गहरी खाई बन गई थी।

भूकंप ने चीन के इस इलाके की लगभग हर चौथी बिल्डिंग को बर्बाद कर दिया। स्कूल, अस्पताल, समेत तमाम बिल्डिंग जमीन में समा गई। भूकंप के बाद हजारों लोग लापता हो गए। चीनी सरकार ने मरने वालों की संख्या करीब 90 हजार बताई, इनमें 5 हजार से ज्यादा बच्चे भी शामिल थे। मरने वाले बच्चों में ज्यादातर स्कूली बच्चे थे जो भूकंप आने के वक्त स्कूलों में थे। करीब पौने चार लाख लोग घायल हुए। भूकंप के बाद हुए भूस्खलन में भी बचाव कार्य में लगे करीब 200 राहतकर्मियों की मौत हो गई। चीन को इस भूकंप से 86 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।

1965: सोवियत स्पेसशिप लूना-5 चांद पर लैंडिंग से पहले क्रैश
चांद के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सोवियत संघ ने 1959 में लूना मिशन शुरू किया था। ये मिशन 1976 तक चला। इस दौरान कुल 24 स्पेसक्राफ्ट चांद पर भेजे गए। 2 जनवरी 1959 को इस मिशन के पहले स्पेसक्राफ्ट लूना-1 की लॉन्चिंग की गई। सोवियत संघ के इस मिशन को एक कामयाब मिशन माना जाता है।

9 मई 1965 को इस मिशन के तहत लूना-5 को लॉन्च किया गया। सोवियत संघ की प्लानिंग इसे चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाने की थी। अगर ऐसा हो जाता तो लूना-5 चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला स्पेसशिप बन जाता, लेकिन लॉन्च के अगले दिन से ही स्पेसशिप में समस्याएं आने लगीं और स्पेसशिप से संपर्क टूट गया। ये अपने एक्सिस पर घूमने लगा और लैंडिंग साइट से दूर जाने लगा। लूना-5 को कंट्रोल करने की वैज्ञानिकों की सारी कोशिशें नाकाम रहीं और आखिरकार 12 मई को ये लैंडिंग साइट से करीब 700 किलोमीटर दूर चांद की सतह से टकराकर क्रैश हो गया। हाल ही में रूस ने लूना मिशन के अगले स्पेसक्राफ्ट लूना-25 को लॉन्च करने की घोषणा की है। रूस की स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस ने कहा है कि 1 अक्टूबर 2021 को लूना-25 लॉन्च किया जाएगा।

1926: नॉर्थ पोल के ऊपर से पहली उड़ान
बर्फ की मोटी चादर से ढके नॉर्थ पोल के ऊपर से आज ही के दिन 1926 में पहली उड़ान भरी गई थी। ये उड़ान नोर्ज नामक विमान से भरी गई थी जिसे एयरोनॉटिक इंजीनियर अंबर्टों नोबिल ने डिजाइन किया था। इस विमान में कुल 16 लोग थे जिनके लीडर रोल्ड अमंडसेन थे। उन्हीं के नाम पर नॉर्थ पोल पर पहली उड़ान मानी जाती है। उड़ान की शुरुआत स्पीट्सबर्ग से की गई और अलास्का में जाकर खत्म हुई। इस सफर को पूरा होने में 3 घंटे लगे।
हालांकि नॉर्थ पोल पर पहली सफल उड़ान को लेकर कई लोगों के अलग-अलग दावे हैं, लेकिन रोल्ड अमंडसेन की उड़ान को ही पहली सफल उड़ान माना जाता है।

12 मई 1899 को रूस में यूजीन पीटरसन का जन्म हुआ था। उन्हें दुनिया की पहली विदेशी योग गुरु माना जाता है।

12 मई 1899 को रूस में यूजीन पीटरसन का जन्म हुआ था। उन्हें दुनिया की पहली विदेशी योग गुरु माना जाता है।

1899: दुनिया की पहली गैर भारतीय योग गुरु यूजीन पीटरसन का जन्म
आज ही के दिन 1899 में रूस में यूजीन पीटरसन का जन्म हुआ था। उन्हें दुनिया की पहली विदेशी योग गुरु माना जाता है। वे योग से इतना प्रभावित थीं कि 1927 में रूस छोड़कर भारत आ गईं। भारत आकर उन्होंने अपना नाम इंदिरा देवी रख लिया और प्रसिद्ध योग गुरु कृष्णामाचार्य की शिष्या बन गईं। उन्होंने दुनिया के कई देशों में योग की शिक्षा दी। योग के प्रति यूजीन की दिलचस्पी को देखते हुए 1987 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय योग फेडरेशन का अध्यक्ष बनाया गया। 2002 में उनका निधन हो गया।

12 मई को इतिहास में और किन-किन वजहों से याद किया जाता है।

2019: मुंबई इंडियंस ने चेन्नई सुपर किंग्स को 1 रन से हराकर IPL का खिताब जीता।
2017: अहमदाबाद में पहले एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम को लॉन्च किया गया।
2010: लीबिया में त्रिपोली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार 103 लोगों की मौत।
2002: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर फिदेल कास्त्रो के साथ बातचीत करने के लिए पांच दिन की यात्रा पर क्यूबा पहुंचे। कास्त्रो की 1959 क्रांति के बाद से क्यूबा की यात्रा करने वाले कार्टर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने।
1965: इजरायल और पश्चिम जर्मनी ने राजनयिक संबंध शुरू करने के लिए पत्रों का आदान प्रदान किया।
1941: दुनिया के पहले पूरी तरह से स्वचालित डिजिटल कंप्यूटर Z3 को बर्लिन में पहली बार वैज्ञानिकों के सामने लॉन्च किया गया। Z3 को जर्मन सिविल इंजीनियर कोनार्ड जुसे द्वारा डिजाइन किया गया था।
1666: पुरंदर की संधि के तहत औरंगजेब से मिलने आगरा पहुंचे शिवाजी की औरंगजेब से मुलाकात हुई।
1459: राव जोधा ने जोधपुर की स्थापना की।

खबरें और भी हैं…

For breaking news and live news updates, like us on Facebook or Whatsapp or follow us on Twitter and Linkedin. Read more on Latest India News on Smart Newsline



Latest News

Janhvi Kapoor twerks, gives piggyback ride in new video; Arjun Kapoor has hilarious reaction | Bollywood

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp Janhvi Kapoor has announced the return of her 'Aksa gang' with a hilarious...

Akshay Kumar busts another FAKE news, denies doing Sajid Nadiadwala’s next with Ahan Shetty | Bollywood

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp The man has so many films in hand, that every day, a new...

Kunal Kemmu gets vaccinated, says he is ‘ready to be back on set’. See pic | Bollywood

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp Actor Kunal Kemmu on Monday received his jab of the coronavirus vaccine. Kunal...

Shilpa Shetty told how doing Bhramari Pranayama increases nitric oxide, helps in fighting corona | शिल्पा शेट्टी ने बताया कि कैसे भ्रामरी प्राणायाम करने...

For breaking news and live news updates, Join us on Whatsapp हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। अगर योग की...

More Articles Like This