Wednesday, May 12, 2021

For the first time after the partition of the country, the Indian Army can go to Pakistan for maneuvers, the meeting of the two foreign ministers possible on March 30 | देश विभाजन के बाद पहली बार युद्धाभ्यास के लिए पाकिस्तान जा सकती है भारतीय सेना, 30 को विदेश मंत्रियों की मुलाकात संभव

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एक सीनियर अफसर ने बताया कि शंघाई सहयोग संगठन के बैनर तले पाकिस्तान के पब्बी इलाके में आतंकवाद निरोधक युद्धाभ्यास होगा और भारतीय सेना उसमें शामिल होगी, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।- फाइल फोटो।

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने की दिशा में एक साथ कई लेवल पर पॉजिटिव कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। ढाई साल में पहली बार पाकिस्तानी अफसरों का दल दिल्ली पहुंचा और मंगलवार को सिंधु नदी जल बंटवारे पर स्थायी आयोग की दो दिन की बैठक शुरू हुई। भारतीय अफसरों का कहना है कि इस बैठक के साथ ही दोनों देशों के संबंध पटरी पर लाने की खिड़की खुली है।

पुलवामा हमले के जवाब में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान और भारत के अधिकारी आमने-सामने बैठकर मुलाकात कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अफसर ने Newsline को बताया कि अभी बहुत कुछ पाइपलाइन में है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बैनर तले पाकिस्तान के पब्बी इलाके में आतंकवाद रोकने वाला युद्धाभ्यास होगा और भारतीय सेना उसमें शामिल होगी।

इसकी अभी सरकारी तौर पर घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस कार्यक्रम से भारत पीछे नहीं हटेगा क्योंकि SCO रूस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है और भारत मॉस्को को नाराज होते नहीं देखना चाहता। लिहाजा भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद इतिहास में पहली बार भारतीय सेना पाकिस्तान में किसी दोस्ताना अभ्यास में शामिल होगी। भारत और पाकिस्तान को बातचीत की पटरी पर लाने में UAE और सऊदी अरब ने भूमिका निभाई है।

इस बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारी अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन इस बात को मान रहे हैं कि बिना आग के धुआं नहीं उठता। संबंधों में यह प्रोग्रेस अचानक नहीं हुई, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया के तहत हुई है। 30 मार्च को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे में हार्ट एशिया काॅन्फ्रेंस होगी। इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी शामिल होंगे। वहां दोनों नेताओं के बीच मुलाकात संभव है।

गौर करने लायक 3 बातें, जो संबंध सुधार का आधार बन रही हैं

1. 25 फरवरी के बाद सीजफायर वॉयलेशन नहीं
25 फरवरी को दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों ने हॉटलाइन पर बातचीत की थी। इसमें तय हुआ था कि सीमा पर सीजफायर सुनिश्चित करेंगे। तब से दोनों तरफ की तोपें शांत हैं। जबकि 1 से 25 फरवरी तक सीजफायर वॉयलेशन की 225 घटनाएं हुई थीं। इससे पहले जनवरी में पाकिस्तान ने कुल 336 बार संघर्ष विराम तोड़ा था।

2. दोनों देशों के नेता कड़े बयान नहीं दे रहे, चुनावों से पाक गायब
पाकिस्तान के PM इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा लगातार नरम बयान दे रहे हैं। इमरान को कोरोना हुआ तो मोदी ने उनके जल्द ठीक होने की कामना की। इधर पांच राज्यों के चुनावी माहौल में भारतीय नेता पाकिस्तान को लेकर कोई बयान नहीं दे रहे हैं। न ही भारत बलूचिस्तान पर बयान दे रहा है।

3. पीएम मोदी ने इमरान को पाकिस्तान दिवस की बधाई दी
दिल्ली स्थित पाक उच्चायोग में मंगलवार को पाकिस्तान दिवस मनाया गया। इस मौके पर मोदी ने इमरान खान को बधाई दी। पाक के उच्चायुक्त ने कहा कि उच्चायोग में जल्द ही नियुक्तियां होंगी।

अरब देशों की मध्यस्थता से 3 बातों पर सहमति

1. दोनों देशों के नेता तल्ख बयान नहीं देंगे। पाकिस्तान नए रिश्तों की पेशकश करेगा, भारत स्वीकार करेगा।
2. भारत में CAA के विरोध जैसे प्रदर्शनों को पाकिस्तान से फंडिंग के सबूत मिले तो शांति वार्ता रोक दी जाएगी।
3. भारत बलूचिस्तान के मसले पर किसी भी मंच पर फिलहाल कोई आवाज नहीं उठाएगा।

एक्सपर्ट बोले- पाक सेना आतंक पर लगाम कसे तो शांति संभव
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक का कहना है कि भारत-पाक के संबंधों को लेकर हो रहे सकारात्मक घटनाक्रमों में कुछ किंतु-परंतु भी जुड़े हैं। अब आगे पाकिस्तान की लीडरशिप और उससे भी कहीं ज्यादा पाकिस्तानी सेना की नीयत की परीक्षा होनी है। पिछले अनुभवों से हमने सीखा है कि तात्कालिक दबाव में पाकिस्तान कुछ कदम उठाता है, लेकिन आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बनाने का उसकी सेना का मोह बरकरार रहता है। इसी से संबंध बिगड़ जाते हैं। फिर भी भारतीय सेना पाकिस्तान में युद्धाभ्यास करती है तो यह ऐतिहासिक पड़ाव होगा। अब आगे पाकिस्तानी सेना को वहां के आतंकी गुटों और ISI की गतिविधियों पर नकेल कसनी होगी। इससे शांति संभव है।

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