Monday, May 17, 2021

Cinemas and multiplexes incur losses of Rs 2000 crores in 6 months due to lockdown | सबसे ज्यादा नुकसान में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री, शुरुआती 6 महीनों में ही मल्टीप्लेक्स को 2000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ

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  • 80 फीसदी सिंगल स्क्रीन, 20 फीसदी मल्टीप्लेक्स बंद, फिर भी आ रही हैं 43 फिल्में
  • दो महीनों में अगर दर्शकों का साथ मिला तो सिनेमाघर इस मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएंगे

लॉकडाउन का ज्यादा नुकसान झेलने वाली इंडस्ट्रीज में एंटरटेनमेंट सबसे आगे है। देश में लॉकडाउन भले ही पिछले साल 25 मार्च को लगा, लेकिन सिनेमाघर 13 मार्च से ही बंद करवा दिए गए थे। मतलब, पूरे देश में सिनेमा हॉल सबसे पहले बंद हुए और खुले भी सबसे आखिर में। अनलॉक के बाद कुछ उम्मीदें बन रही थीं, लेकिन अब देश में कोरोना की नई लहर आ गई है। ऐसे वक्त में भी सिनेमा उद्योग आस लगाए बैठा है। इस साल 43 फिल्में रिलीज हो रही हैं और ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि ये फिल्में बॉलीवुड को घाटे से बाहर ले आएंगी।

43 हिंदी फिल्मों से घाटे की भरपाई की उम्मीद
देश में मल्टीप्लेक्स कॉन्सेप्ट लाने वाले सीनियर ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े बताते हैं कि भारत में कुल 9,600 स्क्रीन हैं। जिनमें से 3500 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन हैं। ऐसा नहीं है कि सिनेमाघर हमेशा घाटे में ही रहेंगे, क्योंकि हाल ही में जिन फिल्मों का अनाउंसमेंट हुआ है, वे ऐसी फिल्में हैं, जो सिनेमाघरों का घाटा पूरा कर देंगी। 2021 में सिर्फ हिंदी में 43 फिल्में आ रही हैं और उनसे काफी उम्मीदें हैं।

सिनेमा बिजनेस पर भारी कोरोना की दूसरी लहर
हाल ही में कार्निवाल मल्टीप्लेक्स ने इंदौर में तीन स्क्रीन वाला मल्टीप्लेक्स खोला है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट कुणाल साहनी कहते हैं, ‘मार्च का आखिर और अप्रैल की शुरुआत का वक्त फिल्मों के लिए बिजनेस के लिहाज से बहुत अच्छा माना जाता है। इस समय जो भी फिल्म आती है, वह अंदाजन 250 करोड़ का बिजनेस कर ही लेती है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते सिनेमाघरों के लिए यह बिजनेस टाइम थोड़ा आगे खिसक गया है। हालांकि हमें फिर भी भरोसा है। दो महीनों में भी अगर दर्शकों का साथ मिला तो सिनेमाघर मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएंगे।’

मल्टीप्लेक्स का एक महीने का खर्च 1 करोड़ तक
मल्टीप्लेक्स का ज्यादातर खर्च उसका किराया, बिजली के बिल, स्टाफ की सैलरी और इक्विपमेंट्स मेंटेन रखने में होता है। कद के हिसाब से हर मल्टीप्लेक्स का एक महीने का औसत खर्च 25 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक होता है। एक मल्टीप्लेक्स में करीब 25 से 50 लोगों को रोजगार मिलता है। लॉकडाउन में कुछ खर्च तो वैसे के वैसे थे, लेकिन आमदनी हुई नहीं। मल्टीप्लेक्स की वजह से जिनका फूड, जॉइंट्स जैसा रोजगार था, उनके नुकसान का तो कोई हिसाब ही नहीं।

2020 की उम्मीद पर कोरोना ने पानी फेर दिया
2019 की बात करें तो बॉलीवुड की 6 फिल्मों ने दो सौ से तीन सौ करोड़ रुपए के बीच कमाई की। माना गया था कि 2020 बॉलीवुड को आमदनी के मामले में नई ऊंचाई पर ले जाएगा। लेकिन 2020 के पहले दो महीनों में रिलीज हुईं कुल 40 फिल्मों में से सिर्फ अजय देवगन की ‘तान्हाजी : द अनसंग वॉरियर’ ने ही 280 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। बाकी सब बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरीं। कोरोना काल में इरफान खान की ‘अंग्रेजी मीडियम’ सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली आखिरी बड़ी फिल्म थी। तीन दिन में फिल्म ने केवल 10 करोड़ का ही कलेक्शन किया था।

कोविड ने ओटीटी का नया मंच भी दिया
अंधकार भरे एक साल के बाद फिल्म इंडस्ट्री अब पूरी ऊर्जा से काम में जुटी है और पटरी पर आने की कोशिश कर रही है। फिल्म प्रोड्यूसर आनंद पंडित बताते हैं, ‘लॉकडाउन और कोविड ने नए मंच भी दिए हैं। ऐसी सिचुएशन में भी कंटेंट कैसे क्रिएट किया जा सकता है, यह फिल्म इंडस्ट्री ने समझा है। अब हर मंच के लिए बिजनेस और मार्केटिंग स्ट्रैटजी भी अलग होगी। ओटीटी एक ऐसा मंच है, जहां फिल्मों से अलग फॉर्मूला काम करता है।’

उजाले की खोज में सिनेमा उद्योग
सिनेमा हॉल्स में कुछ पल के अंधकार के बाद दर्शकों के चेहरे पर स्क्रीन से आती किरणों का उजाला छा जाता है। यही उजाला आम आदमी को अपने रोजमर्रा के संघर्ष के अंधकार को कुछ पलों के लिए दूर करने में मदद करता है। इसी उजाले की खोज आम आदमी को बार-बार सिनेमाघरों में खींच लाती है, लेकिन आज लॉकडाउन के एक साल बाद हालात ये हैं कि पूरा सिनेमा उद्योग खुद उसी उम्मीद के उजाले की खोज कर रहा है। शायद आने वाली फिल्में ये उजाला लेकर आएं।

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